सुप्रीम कोर्ट के 45th मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो गये|

इन के बाद जस्टिस रंजन गोगोई मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के बनेंगे |

यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के जज दीपक मिश्रा के बारे में जानना क्योंकि उन्होंने 13 महीने के कार्यकाल में जो निर्णय लिए हैं वह बहुत ही अच्छे रहे हैं यानी यह आधार-भूत चीजों में परिवर्तन लाने में भविष्य में कारगर अवश्य होगा,  क्योंकि इन 13 महीने के कार्यकाल में जो भी दीपक मिश्रा के मुख्य न्यायाधीश के रहते उसमें बहुत सारे ऐसे फैसले सुप्रीम कोर्ट के आए जो कि बहुत ही सही साबित हो सकते हैं भविष्य में, पहला सबसे बड़ा फैसला आया,

2016 में महत्वपूर्ण फैसला यह है कि सिनेमाघरों में मूवीस शुरू होने से पहले राष्ट्रगान शुरू होगा और सभी को खड़े होकर के राष्ट्रगान का सम्मान करना होगा

समलैंगिकता पर जिसमें 377 को असंवैधानिक घोषित किया गया,कि समलैंगिकता जो है वह अवैध नहीं है, समलैंगिकता कोई कानूनी अपराध नहीं है |

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के पूजा-अर्चना पर रोक को हटा दिया है अब सीधे 10 से 50 साल की महिलाएं सबरीमाला मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना कर सकती हैं इस प्रथा को कोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में देकर के एक बहुत ही बड़ा क्रांतिकारी फैसला सुनाया|

साथ ही साथ आधार की अनिवार्यता को संवैधानिक तौर पर बैध किया है इनकम, टैक्स पैन कार्ड और योजनाओं के लाभ लेने के लिए जरूरी होगा | लेकिन बैंक खाता मोबाइल या स्कूल में आधार कार्ड की अनिवार्यता अनिवार्य नहीं है |

समलैंगिकता को आईपीसी 377 से हटा दिया गया है प्रमोशन के मामले में दीपक मिश्रा ने जो कहीं वह बहुत ही अच्छी बात है कि एससी और एसटी के लिए राज्य सरकार ही तय करें कि किसको कितना आरक्षण देना है |

आईपीसी 497 मैं एडल्ट्री को अपराध के दायरे से हटा दिया गया है|

और इसके साथ ही यह भी बहुत महत्वपूर्ण निर्णय आया है कि इस्लाम में यह जरूरी नहीं है कि मस्जिद में ही नमाज अदा किया जाए |

मस्जिद नमाज  का अभिन्न अंग नहीं है तो कहीं भी नमाज पढ़ी जा सकती है |

एक फैसला इन्होंने भी दिया कि दहेज प्रथा की प्रताड़ना में अब  पति और उसके परिवार को अरेस्ट किया जा सकता है |

12 जनवरी 2018 को जो की एक बैठक में उनका विरोध किया गया और जो की पहली बार रहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज बाहर निकले और अपनी आपत्ति दर्ज कराई मीडिया के सामने |

दीपक मिश्रा मुख्य न्यायाधीश थे जिनके कार्यकाल में ही उनके खिलाफ पद से हटाने का प्रस्ताव लाया गया संसद में लेकिन उससे बाद में रिजेक्ट कर दिया गया|

तो यह भारत के 45 में मुख्य न्यायाधीश थे जिन्होंने 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर काम करना शुरू किया था |

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